समझी ? June 27, 2017 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps ना तो तुम ज़न्नत की हूर हो , ना ही कहीं की नूर हो ना तो छायी हो ज़माने के दिलों पे ना ही लाखों का सुरूर हो अरे तुम जैसी लाखों पड़ी हैं यहां , पर हाय रे करम , तुम ही मेरा गुरूर हो ।। Comments
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