"आशीष-आपका"
















जीवन के अविरत पथ पर ,कई पथिक मुझसे भी मिले;
कुछ ने देखा अनदेखा कर,पर कुछ्से स्नेह मिले |
भाया मुझको कुछ का साथ ,कुछके अनुभव का समीर;
कुछ का सहयोगी-प्रेम-भाव ,कुछ के तीव्र बुद्धि का तीर |
कई पथिक जो मुझको भाए,कुछ्ने मेरा साथ दिया ;
कुछ्ने जब भटका मैं पथ से ,अपना सहयोगी हाथ दिया ||
वंदन तुझे है कोटि -कोटि ,मेरे अतिप्रिय पथिक महान;
तुमसे ही अनुभव पाया मैं ,पाया कुछ उन्नति के तान |
ईश सदृश ही हो तुम प्रिय ,तुम ही प्रेरणास्रोत महान;
कर ध्यान तुम्हारा निश्छल मन से ,करता हूँ मैं तुम्हे प्रणाम ||

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