एक दौर ऐसा भी था……


















मेरी भी जीवन बगिया में,
आते रहे कुछ फ़ूल -कुछ कांटे ,
कुछ वीरानियां कुछ मुलाकातें ,
सूरज की तपिश भरे जले से दिन
और करवटों में कटीं उलझनी रातें ।
इन दिनों बहुत याद आये 
अपने मुँहबोले खास और उनकी,
 वादों भरी मुँहबोली बातें ।
परिचित की आस में बहुत मिले मुझे
कुछ अज़नबियों के एहसान ,
कुछ अकल्पित से नाते ।
पर फ़िर भी आँखें लगी रहीं
 उन्हीं कदमों पर, जिनके आने पर
खिलती थीं इस अधमरे की बाँछें॥
आज भी याद हैं मुझे वो प्यारे से दिन ,
वो खुशनुमा रातें……
हर पल हँसाये जो ख्वाब
हर पल हँसायी जो बातें……
मुझे याद हैं वो सारी बातें…॥

Comments

  1. behatareen hai... upmaon ka bohot badhiya tareeke se prayog kiya hai... sateek!

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