गुलशन गुल से महकेगा
प्रीत डाल पर बैठ प्यार से
मन का पंछी चहकेगा
हाथों में होंगे हाथ
क़दमों की थाप सुरीली होगी
आँखों आँखों में बातें होंगी
औ हर इक बात रसीली होगी
हर सांसे प्रीत की गर्मी से
कुछ ऐसी हलचल कर जाएँगी
नाचेगा मन उचक उचक कर
आँखे सपनों से भर जाएँगी
हो भी क्यों ना ? बात ही ऐसी ,
अरसों बाद मिलन होगा
हर्ष-मयूर नृत्य करेंगे
सुरभित हम दोनों का मन होगा
देखो इन फूलों -कलियों को , इनमे कैसी उत्सुकता छाई
पता इन्हें भी खूब भले से के पिया मिलन की रुत आई ....

ek baar fir sunder!
ReplyDeletejis tarah se ek yuva hriday ki utsukta ko bataya hai, saaf dikhta hai ki bhavnaon se nikli hui kavita hai...