पहले तो मुझे लगा कि शायद उन्होंने पहचाना नहीं ,पर
अगले ही पल लगे झटके ने बता दिया
वे मुश्किलें जो भले कुछ समय के लिए हुई थीं दूर मुझसे
आज भी मुझे ही चाहती हैं
सचमुच आज फिर सब कुछ पहले जैसा लग रहा है
आज फिर सारी बातें याद आ रही हैं ,पर
क्या मतलब बनता हैं इन यादों का
भावनाओं में बोली गयी उन मीठी बातों का
फिर उठने लगा है रिश्तों से विश्वास
फिर हो रहा अनंत एकल होने का एहसास
मेरी भावनाएं मेरा आभास
मेरे स्वप्न जो थे कुछ खास
फिर से घुटन भरा मौसम लो दस्तक देने को है तैयार
फिर से खूब लुटा है देखो मेरा मन और मेरा प्यार
एक के बाद एक हादसों ने एहसास करा दिया है अब
सच्चाई क्या है ,क्या है छलावा
क्या है अटूट सम्बन्ध ,क्या है दिखावा
क्या है आस्था ,क्या है लगाव
क्या है प्रेम ,क्या है जुडाव
अब शायद सही फितरत यही होगी कि जानकर भी रहूँ अनजान
अपने ही सपनों में अपनी ही यादों में बना रहूँ मेहमान
शायद तभी यकीं होगा इन दर्द के सरकारों को
के हर बार गया दुत्कारा, मैं भी हूँ इंसान
समझो मुझे मैं भी हूँ इंसान ......
मैं भी एक इंसान !

bohot sunder Amish!!
ReplyDeletethanks bhai
ReplyDelete