आखें भर आती हैं ......


रंग देखे तेरे कई इस छोटी सी उमर में ऐ जिंदगी
यकीं नहीं होता अमिष पर आँखें भर आती हैं
ना जाने ये मेरी हसरत थी या तेरी फितरत है
वो जो आज भी टीस जाता है दिल को मेरे
मेरी मोहब्बत थी या तेरी नफरत है !!!
या मौला ! जो मुझे दिया अब तक
ख्वाब में  भी किसी को न देना
गर देता भी ख्वाब प्यारे किसी को
दिल नाज़ुक उसे तुम ना देना
जख्म भर से गए हैं और दर्द भी नहीं हो रहा
पर जिन्दगी तेरी किताब जब भी पलटता हूँ
आखें भर आती हैं ......

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