बीते लम्हों को याद करूँ, ना करूँ ?
गर कर भी लूँ याद एक पल के लिये;
उन लम्हों में जा, फिर से तुम्हे
प्यार करूँ, ना करूँ ?
गर कर भी लूँ प्यार एक पल के लिये;
फिर प्यार में आ, तुम्हे पाने की
फ़रियाद करूँ, ना करूँ ?
गर कर भी लूँ फ़रियाद एक पल के लिए;
ले वास्ता उस फ़रियाद का,
तेरा इन्तेज़ार करूँ, ना करूँ ?
गर कर भी लूँ इन्तेज़ार एक पल के लिए;
तेरे इन्तेज़ार में आँखें मूँद,
तेरा दीदार करूँ, ना करूँ ?
गर कर भी लूँ तेरा दीदार एक पल के लिए;
दीदार में सपनों के संसार की
शुरुआत करूँ, ना करूँ ?
गर कर भी लूँ शुरुआत एक पल के लिये;
कुछ भी तो ना कर पाउँगा मैं, 'फिर से'
बेहतर होगा मेरे लिए, मैं
बीते लम्हों को याद ना ही करूँ
कोई फरियाद ना ही करूँ,
शान्त हो जाऊँ तसल्ली से
कोई शुरआत ना ही करूँ,
मैं तुम्हे भूल ही जाऊँ, और
तुम्हारा दीदार ना ही करूँ,
मैं तुमसे प्यार ना ही करूँ ।।
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