:') मैं बस इन्हीं के संग रहूँगा :'(

लिखूं माता –पिता पर कुछ बस सोच ही रहा था
के अचानक मन की टाईम मशीन ने काम कर दिया
गया अतीत के  झरोखों पर ..
देखा वो नादान बचपन जो आज भी कमोबेस कायम है
वो शरारतें जो दस साल पहले कीं
वो बात बात पर रोना
नए कपड़े पहन कर खुद को हीरो समझना
हर एक बात पर दी से लड़ना
मम्मी का मुझपर गुस्साना
मेरे रोने पर फिर प्यार से समझाना
पापा के ऑफिस से आने पर “चिज्जी ” मांगना
सब याद आ गया आज फिर से
आज जबकि दूर हूँ घर से और कुछ तो नही कहूँगा
बस खुदा से गुजारिश है मेरी
माँ बाप देना यही हर जनम ,मैं इन्ही के संग रहूँगा

मैं बस इन्हीं के संग रहूँगा ||

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