अब गर कहके कहना होगा के तुमके नहि भूलेंगे
तो मैं कुछ न बोलूँगा
गर तुम सब हो खान ह्रदय में अब ये भी बतलाना बाकि
तो कुछ न बोलूँगा
हो पिया मिलन का कोई वसंत
या मन का पंछी कलरव दे
मादकता छाये कितनी भी
हर हवा चाहे कितने स्वर दे
वादा !! ना भूलेंगे तुमको
हम हर एक अवसर पर
याद रखेंगे तान तुहारी
हम अपने सारे स्वर पर ...
'अमिष'
तो मैं कुछ न बोलूँगा
गर तुम सब हो खान ह्रदय में अब ये भी बतलाना बाकि
तो कुछ न बोलूँगा
हो पिया मिलन का कोई वसंत
या मन का पंछी कलरव दे
मादकता छाये कितनी भी
हर हवा चाहे कितने स्वर दे
वादा !! ना भूलेंगे तुमको
हम हर एक अवसर पर
याद रखेंगे तान तुहारी
हम अपने सारे स्वर पर ...
'अमिष'
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