हो घर का मेलजोल 'अमिष' या सुविधा महलों की अपार
हो प्रेम सगों का अति निश्छल , या टूटे मन के तार
उत्फुल्ल कभी बेबात ये ,बेबात ये रोया करती है
बस जिस रंग का चश्मा होता है उस रंग की दुनिया होती है
हो प्रेम सगों का अति निश्छल , या टूटे मन के तार
उत्फुल्ल कभी बेबात ये ,बेबात ये रोया करती है
बस जिस रंग का चश्मा होता है उस रंग की दुनिया होती है
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