समझ सकता हूँ प्रिये , मैं तेरे मन की करुणा को
तुझको दर्द देनी वाली तेरी प्रियतम तरुणा को
होता है अक्सर ऐसा इस मतलब के संसार में
फांसे जाते तुम जैसे सीधे झूठ मूठ के प्यार में
माना रोना आता है जब भी याद सताती उनकी
काया पीर तो सह ले तू पर सही न जाती पीर मन की
और हाँ इश्क इबादत है , सुन मेरे प्यारे
ये तुच्छ नही , है उच्च बनाता
साधना सच्चाई की ये
अमर है वो जो इसको ध्याता .....
तुझको दर्द देनी वाली तेरी प्रियतम तरुणा को
होता है अक्सर ऐसा इस मतलब के संसार में
फांसे जाते तुम जैसे सीधे झूठ मूठ के प्यार में
माना रोना आता है जब भी याद सताती उनकी
काया पीर तो सह ले तू पर सही न जाती पीर मन की
और हाँ इश्क इबादत है , सुन मेरे प्यारे
ये तुच्छ नही , है उच्च बनाता
साधना सच्चाई की ये
अमर है वो जो इसको ध्याता .....
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