आस...

कस्तूरी किस म्रृग को मिली है 
जो मैं भी आसार लगाऊँ 
झूठे प्रेम की दरिया मे 
मैं डुबकी कितनी बार लगाऊँ ???
जब श्वास रुकी है इस तन की
मैं किस सुरभि की आस लगाऊँ ?
जब जिह्वा ही जल चुकी है मेरी 
क्या मधुशाले में प्यास बुझाऊँ !!!!!!!!!!!

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