काश !!

काश! मैं कुत्ता होता
कम से कम कोई कुत्ता न कहता 
प्यारा सा घर होता मेरा
मेमो की गोद में लेट प्यार से 
हर दिन मैं पुचकारा जाता
टाफ, पमी, मोती, जॉनी
टामी नामो से जाना जाता

मेरे खुद के बिस्किट होते
मेरा भी एक शैम्पू होता
कार बैठ सवारी करता
स्वीट सा लवली मुंह होता.........

ऐसा ही कुछ सोच रहा था 
मंदिर बाहर बैठ भिखारी
जब देखा एक दुलारा कुत्ता
साथ में मैडम गोरी प्यारी 

बोला ; क्या मैं इतना बुरा 
जो एक रुपये से जाता दुतकरा
ऐसा भी क्या उस कुत्ते में
जो है सबका प्यारा प्यारा

फिर आई याद नसल अपनी
कि मैं तो एक 'गरीब' हूँ
मेरी 'ब्रीड' नहीं है नाईस
शायद इसीलिए अजीब हूँ !! 

मन अकुलाया,गुस्सा भी आया
थोडा सोचा फिर चिल्लाया
काश! मैं भी कुत्ता होता.....
काश! मैं  कुत्ता होता.....

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