मर्म समझो महिमा का , अलौकिक होगा तेरा मिलन
ईश स्वयं ही साक्षी होंगे , दिव्य होगा तेरा मन
फिर क्या रखा है यौवन में , क्यों रमते हो तुम काया में
मन को जोड़ो मन से बस , मत उलझो जग की माया में
क्या कम है इतना प्रिये कहो ,सजनी ने श्रृंगार किया
समझा तेरी प्रीत को , जो खुद को तैयार किया .....
ईश स्वयं ही साक्षी होंगे , दिव्य होगा तेरा मन
फिर क्या रखा है यौवन में , क्यों रमते हो तुम काया में
मन को जोड़ो मन से बस , मत उलझो जग की माया में
क्या कम है इतना प्रिये कहो ,सजनी ने श्रृंगार किया
समझा तेरी प्रीत को , जो खुद को तैयार किया .....
Comments
Post a Comment