के फूल कागज के हैं

नफरत नहीं हैं हमें आपसे 
ना ही कोई शिकायत है 
रंग हमे भी भाते हैं भरपूर मेरे दोस्त 
खुशबू हमें भी मदहोश कर जाती है 
अच्छा लगता है देख आपका प्यार 
आपका अपनापन हमे खुश कर जाता है 
पर आप ही बताइए क्या कुसूर है हमारा 
आपके प्यार में ही खोया रहता है ये 'अमिष' बेचारा 
पर कुछ हरकतें हो ही जाती हैं ना जाने क्यूँ 
अब इन कमबख्त आँखों को ही ले लीजिए 
टपाक से भांप जाती हैं ;
के फूल कागज के हैं ...

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