तुम ही मेरी सच्ची साथी,
तुमसे जो चाहे कहता हूँ;
मैं खुश हूँ,
या गम का मारा,
हूँ राजा सा,
या आवारा;
जीता कुछ,
या सबकुछ हारा,
तुमसे गाता चिट्ठा सारा,
तुम ही हो बस एक मेरी,
जिससे मैं सब कुछ कहता हूँ ।।
मेरे जीवन रंगों में ,
मेरे संग कितनी सच्ची हो !
मेरा हर पल साथ निभाती
‘कविता’ तुम कितनी अच्छी हो ।।
Comments
Post a Comment