इत्तेफ़ाक़













बस इत्तेफ़ाक़ की बात है 'अमिष'

टूट रहे हम, अरमान आपका लुट रहा

हमसे ऐसी भी क्या दिल्लगी यारा

कि मैयत हमारी है, जनाज़ा आपका उठ रहा ।।

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