एक हथेली धूप













भले से याद है मुझे;
वो बातों का जंगल
वो झगड़ों का झुरमुट
वो ठिठोली वाली तलैया
वो रोने वाली बाग़
वो खेलने वाला मैदान
दो टूटी हुई कुर्सियां
और एक हथेली धूप  ।।

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