जो केसरिया का त्याग हैं, हैं श्वेत -शान्ति समान ,
हरियाली जिनसे हरी,शत-शत उन्हें प्रणाम ।
शत-शत उन्हें प्रणाम जो सीमाओं की शान हैं ,
भारत रक्षा में तत्पर हैं, निखिल देश का मान हैं ।
जो सीमाओं पर डटे हुए हैं, हैं अतुल साहसी देश-रत्न ;
भारत की जय गाथायें हैं जिन वीरों का वीर-प्रयत्न ॥
जो मातृभूमि की रक्षा में करते न्यौछावर अपना तन-मन ;
पुजनीय उन वन्दनीय को, करता 'अमिष' है कोटि नमन ॥
जिनके दम से खिला हुआ है ,भारत की माटी का रंग ;
जिनके साहस पर आश्रित हो,हम खुश हैं अपनों के संग ।
जिनके बल से रक्षित हो, पाते हम नित नव आयाम ;
उन सीमा-प्रहरी वीरों को,शत प्रणाम शत-शत प्रणाम ॥

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