मन के जन को धुनता हूँ October 10, 2017 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps जन देखूँ, मैं मन देखूँ, फिर मन के जन को धुनता हूँ । मन में आये भाव अगर, तो शब्दों में उनको बुनता हूँ ।। Comments
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