गंगा














तेरी धारा का देख प्रवाह
मन मेरा भी बहना चाहे
सुन तेरी कल - कल तानें
मन मेरा भी कहना चाहे ।
मन चाहे तेरी निर्मलता
ये चाहे तेरा वेग प्रबल;
तुझ सा विस्तृत ह्रदय अगाध
तुझ सा पावन अंतस-जल ।
तेरी शीतलता है अतुल्य
महिमा तेरी है अनुपम;
तोड़ सके चट्टानों को भी
मन चाहे पाना ऐसा ही दम ।
तुम पुण्या हो तुम पूज्या हो
तुम हो माया अति अविराम,
हे देवों की सरिता गंगा
करता अमिष तुम्हें प्रणाम ।

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