हर छंद-काव्य में एक राग,
हैं शब्द कोटि , पर एक वाग ।
हैं तन्तु कई पर एक ताग,
तरुणाई में बलात-रोपित
करुणामय अनुचित वैराग।।
हैं भाव लक्ष पर एक भवान
हैं यंत्र कई पर एक तान
हैं जन्म कई पर एक प्राण
हैं लक्ष्य कई पर एक बाण
समय की लीला से पीड़ित
मेरे अंतस का आह्वान ।।
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