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तुम कितनी अच्छी हो

तुम

सरोकार

कल्पना

वो जैसा भी अफ़साना था

जिस रंग का चश्मा होता है उस रंग की दुनिया होती है..

इश्क इबादत है ..

के फूल कागज के हैं

मर्म

काश !!

आस...

सब सही है....

विदा ..

आँखों को पहचान लो ...

फ़िर भी लगती अन्जानी वो...

रंग...

हम चलते जा रहे हैं...

अपेक्षा और विश्वास की गुत्थी.......